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एंडोमेट्रियल कैंसर उन कुछ कैंसर में से एक है जिसका प्रारंभिक चरणों में पता लगाया जा सकता है क्योंकि इसके कारण योनि से असामान्य रक्तस्राव होने लगता है जिसके लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
एंडोमेट्रियल कैंसर, जिसे कभी-कभी यूटरिन (गर्भाशय) कैंसर के रूप में भी जाना जाता है, एंडोमेट्रियल कैंसर तब होता है जब यूटरिन (गर्भाशय) की एंडोमेट्रियल दीवार में मौजूद कोशिकाएं (सेल्स) विभाजित होने लगती हैं और असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं।
एंडोमेट्रियल कैंसर उन कुछ कैंसर में से एक है जिसका प्रारंभिक चरणों में पता लगाया जा सकता है क्योंकि इसके कारण योनि से असामान्य रक्तस्राव होने लगता है जिसके लिए तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
मोटापा एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक पाया गया है।
एंडोमेट्रियल कैंसर के पहले लक्षणों में से एक है योनि से असामान्य रक्तस्राव जिसका मासिक धर्म चक्र से कोई संबंध नहीं होता है। एंडोमेट्रियल कैंसर से जुड़े अन्य लक्षणों में शामिल हैं :
हालांकि ऐसे कोई ज्ञात कारण नहीं हैं जो एंडोमेट्रियल कैंसर से जुड़े हों, शोधकर्ताओं ने कुछ जोखिम कारकों की पहचान की है जो एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं :
अतिरिक्त फैटी टिशू (वसायुक्त ऊतक) एस्ट्रोजेन के स्तर को बढ़ाने में योगदान देते है, और इसके कारण एंडोमेट्रियल कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
50 और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में एंडोमेट्रियल कैंसर होने का जोखिम अधिक पाया जाता है।
जिन महिलाओं का एंडोमेट्रियल कैंसर का पारिवारिक इतिहास होता है, उनमें एंडोमेट्रियल कैंसर के निदान का जोखिम अधिक होता है।
जिन महिलाओं का ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर और ओवेरीअन (डिम्बग्रंथि) के कैंसर का इलाज किया गया है, उनमें भी एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में भी एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
जो महिलाएं पशु वसा की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करती हैं, उनमें भी एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
जिन महिलाओं को 12 साल की उम्र से पहले माहवारी शुरू हो गई है; उनमें रजोनिवृत्ति देर से होती है यह भी एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है।
जो महिलाएं कभी गर्भवती नहीं हुई उन्हें भी एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिन महिलाओं ने पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में कैंसर के उपचार के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) ले ली है, उनमें भी एंडोमेट्रियल कैंसर के निदान का जोखिम अधिक होता है।
एंडोमेट्रियल कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए कई नैदानिक परीक्षण उपलब्ध हैं।
जब कोई मरीज एंडोमेट्रियल कैंसर के लक्षणों के साथ आता है, तो डॉक्टर मरीज़ के पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में गांठ और अन्य असामान्यताओं जैसे बीमारी के संकेतों की शारीरिक जांच करेंगे। डॉक्टर मरीज़ के मेडिकल इतिहास को समझने का भी प्रयास कर सकते है जिसके दौरान परिवार के इतिहास, मरीज़ जिन लक्षणों का अनुभव कर रहे है, पिछली / मूलभूत चिकित्सा स्थितियां आदि पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
एंडोमेट्रियल बायोप्सी के दौरान, गर्भाशय में एक पतली और लचीली ट्यूब डालकर एंडोमेट्रियल ऊतक की छोटी मात्रा निकाल ली जाती है। बाद में, किसी भी प्रकार की असामान्य कोशिकाओं (सेल्स) की उपस्थिति के लिए उस उतक के नमूने की माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है।
डाइलेशन और क्यूरेटेज में गर्भाशय की परत से ऊतक को इकट्ठा करना और कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) की उपस्थिति के लिए माइक्रोस्कोप के तहत इसकी जांच करना शामिल है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) को खोला जाता है (फैलाया जाता है), और एक क्यूरेट, जो एक चम्मच के आकार का विशेष उपकरण होता है, यूटरिन (गर्भाशय) की परत के पर्याप्त नमूनों को छीलकर निकालने के लिए उसका उपयोग किया जाता है, उस नमूने को आगे जांच के लिए भेजा जाता है।यह प्रक्रिया असुविधा पैदा कर सकती है, और प्रक्रिया के दौरान सामान्य अनेस्थिसिया या सीडेटिव (शामक) का उपयोग किया जाता है।
आमतौर पर एंडोमेट्रियल कैंसर निदान के लिए ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड इस इमेजिंग टेस्ट की सिफारिश की जाती है। क्या ट्यूमर बढ़ रहा है या एंडोमेट्रियल अस्तर में कोई असामान्यताएं हैं यह पता लगाने में इमेजिंग टेस्ट डॉक्टर की सहायता करती है।इसके साथ ही, कैंसर अन्य अंगों में फैल गया है या नहीं यह जांचने के लिए डॉक्टर अतिरिक्त इमेजिंग टेस्ट, जैसे पेट सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, छाती का एक्स-रे आदि की भी सिफारिश कर सकते हैं।इन परीक्षणों का उपयोग बीमारी की स्टेजिंग, उपचार योजना, चिकित्सा निगरानी और बीमारी रिलैप्स (पुनरावर्तित) हो गई है या नहीं इसकी जांच करने के लिए भी किया जा सकता है।
एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए उपचार योजना कई कारकों पर विचार करने के बाद तैयार की जाती है, जैसे रोग का चरण, ट्यूमर का सटीक स्थान, इसका आकार, मरीज़ की उम्र और मरीज़ की वरीयताओं के साथ उसकी कुल स्वास्थ्य स्थिति।
एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए उपलब्ध मुख्य उपचार विकल्पों में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) शामिल हैं। कुछ मामलों में, डॉक्टर टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा), इम्यूनोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।
एंडोमेट्रियल कैंसर के इलाज का मुख्य तरीका सर्जरी है। ट्यूमर को श्रिंक करने (सिकोड़ने) के लिए सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) दी जा सकती है। सर्जरी के बाद भी इन उपचारों की सिफारिश की जा सकती है - इससे बची हुई कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) से छुटकारा पाने में मदद मिलती है और बीमारी का पुनरावर्तन (रिलैप्स) होने का खतरा कम होता है।एंडोमेट्रियल कैंसर की सर्जरी या तो ओपन सर्जरी या मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) हो सकती है। एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए उन्नत लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जिकल दृष्टिकोण उपलब्ध हैं - उपचार के इन दृष्टिकोण के कारण उपचार की जटिलताएं कम होती हैं और तेजी से ठीक होने में सहायता मिलती हैं। एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए उपलब्ध मुख्य सर्जिकल विकल्प निम्नलिखित हैं और डॉक्टर स्थिति की गंभीरता के आधार पर इनमें से किसी एक की सिफारिश कर सकते हैं :
चूंकि ट्यूमर यूटरिन (गर्भाशय) की परत में बनता है, इसलिए यूटरिन (गर्भाशय) को निकालने की सिफारिश की जाती है। जब कैंसर का विकास केवल गर्भाशय की परत तक ही सीमित होता है तब यह प्रक्रिया की जाती है ।
इस प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब और ओवरी (अंडाशय) को निकालना शामिल है। यह यूनिलैटरल (एक तरफ की फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को निकालना) या बायलैटरल (दोनों तरफ की फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को हटाना) हो सकता है।
पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन में अगर कैंसर के फैलने का संदेह हो तो पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र के लिम्फ नोड्स को निकालना शामिल है। कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए उनकी और जांच की जा सकती है।
जो महिलाएं उन्नत चरणों के एंडोमेट्रियल कैंसर से पीड़ित है जिनमें रोग ब्लैडर (मूत्राशय), लोअर कोलोन (निचले बृहदान्त्र), रेक्टम (मलाशय) आदि में फैल गया है उनके लिए इस प्रक्रिया की सिफारिश की जा सकती है। इस प्रक्रिया के दौरान (कुछ मामलों में) लोअर कोलोन (निचले बृहदान्त्र) के साथ साथ ओवरी (अंडाशय), फैलोपियन ट्यूब, यूटरस (गर्भाशय), सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), योनि, ब्लैडर (मूत्राशय) और रेक्टम (मलाशय) को निकाला जा सकता है। इस प्रक्रिया के बाद, मूत्र और मल पास होने के लिए एक कृत्रिम ओपनिंग (स्टोमा) बनाया जा सकता है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के दौरान, कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) का उपयोग किया जाता है। एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को बाहरी रेडिएशन (विकिरण) स्रोत (इक्स्टर्नल रेडिएशन थेरेपी (बाहरी विकिरण चिकित्सा)) का उपयोग करके या शरीर के अंदर रेडिएशन (विकिरण) स्रोत को ट्यूमर के बहुत करीब रखकर (ब्रेकीथेरेपी) प्रशासित किया जा सकता है।
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मारने के लिए प्रभावशाली एंटीकैंसर दवाओं का उपयोग करती है। आमतौर पर, उपचार में एक से अधिक कीमो दवाओं का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी को मौखिक रूप से या इन्ट्रवीनस्ली (नस के माध्यम से) प्रशासित किया जा सकता है। उपचार की समग्र प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए सर्जरी से पहले और बाद में भी कीमोथेरेपी दी जाती है।
हार्मोन थेरेपी को अक्सर कीमोथेरेपी के साथ दिया जाता है। यह उपचार दृष्टिकोण विशिष्ट हार्मोन रिसेप्टर्स वाले एंडोमेट्रियल कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) के विकास को रोककर काम करता है। उन्नत चरण के एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी की अधिक सिफारिश की जाती है।
टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) पर मौजूद विशिष्ट कमजोरियों की पहचान करती है और कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को मारने या उन्हें बढ़ने से रोकने के लिए उन पर हमला करती है। उन्नत चरण के एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) की अत्यधिक सिफारिश की जाती है।
यह एक अनोखा उपचार दृष्टिकोण है जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) पर हमला करने के लिए उत्तेजित करता है। आमतौर पर, कैंसर कोशिकाएं (सेल्स) विशेष प्रोटीन का संश्लेषण करती हैं जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं (सेल्स) को कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) पर हमला करने से रोकती हैं, और इम्यूनोथेरेपी उन विशेष प्रोटीनों को अवरुद्ध करके काम करती है। इम्यूनोथेरेपी उन मामलों में दी जा सकती है जहां अन्य उपचार काम नहीं करते हैं।
हां, एंडोमेट्रियल कैंसर का इलाज संभव है। आज हमारे पास उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं जो इनवेसिव (तेजी से फैलने वाले) एंडोमेट्रियल कैंसर के इलाज में भी हमारी मदद कर सकते हैं। अन्य दूसरे प्रकार के कैंसर की तरह, एंडोमेट्रियल कैंसर के मामले में भी जल्दी पता लगने से काफी मदद मिलती है। दो सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाले लक्षणों पर नज़र रखना और उन्हें अपने डॉक्टर को बताने से आपको प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार में मदद मिल सकती है।
हां, कुछ मामलों में एंडोमेट्रियल कैंसर वापस आ सकता है। फिर भी, अगर इसका निदान जल्दी हो जाए तो इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। अपने प्रारंभिक चरण में एंडोमेट्रियल कैंसर के पुनरावर्तन (रिलैप्स) का पता लगाने के लिए, मरीज़ों को अपने उपचार के पूरा होने के बाद बिना चूके अपनी फालो – अप अपॉइंटमेंट को जारी रखने के बारें में अत्यंत जागरुक रहना चाहिए।
अधिक वजन या मोटापा एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में से एक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अतिरिक्त फैट टिशू (वसायुक्त ऊतक) एस्ट्रोजेन स्तर को अधिक बढ़ाने में मदद करते है, जो बदले में एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। दूसरी ओर, चिकित्सकीय रूप से यह साबित हुआ है की अधिक वजन वाली या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए वजन कम करना महत्वपूर्ण है।
हां, एंडोमेट्रियल कैंसर अनुवांशिक रुप से विरासत में मिल सकता है। ऐसे मामलों में, महिलाओं को एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के साथ साथ अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए और उनके एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करने के उपायों के बारें में अपने बात करनी चाहिए।
एंडोमेट्रियल कैंसर को पूरी तरह से रोकने का कोई भी ज्ञात तरीका उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, कुछ उपाय हैं जो इस बीमारी के विकास के जोखिम को कम करने के लिए आप कर सकते हैं:
स्वस्थ वजन बनाएं रखना अन्य कई स्वास्थ्य विकारों के साथ-साथ एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संतुलित आहार का सेवन करना जिसमें सब्जियां, फल और फाइबर शामिल हों, यह एंडोमेट्रियम के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है और एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को कम करता है।
सुस्त जीवन शैली होना भी एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है। नियमित व्यायाम करने से आपको एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
तंबाकू में मौजूद हानिकारक रसायनों से एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो आपको तुरंत इसे छोड़ देना चाहिए, धूम्रपान छोड़ने से न केवल एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम कम होता है बल्कि कई अन्य प्रकार के कैंसर का जोखिम भी कम हो जाता है।