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प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर भारतीय पुरुषों में सबसे आम 10 कैंसर में से एक है। हालांकि, यह धीमी गति से बढ़ने वाले कैंसर में से एक है और नियमित स्क्रीनिंग (जांच) टेस्ट से आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो पुरुषों में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) जो मूत्राशय के पास स्थित अखरोट के आकार की छोटी ग्रंथि होती है, उसमें विकसित होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) शुक्राणुओं का पोषण करने वाले प्रोस्टेटिक द्रव का उत्पादन करती है। यह प्रोस्टेटिक द्रव पदार्थ वीर्य पुटिकाओं के द्रव पदार्थ के साथ मिलकर वीर्य बनाता है जो शुक्राणुओं को स्थानांतरित करता है।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर भारतीय पुरुषों में सबसे आम 10 कैंसर में से एक है। हालांकि, यह धीमी गति से बढ़ने वाले कैंसर में से एक है और नियमित स्क्रीनिंग (जांच) टेस्ट से आप इसका प्रारंभिक चरणों में निदान कर सकते हैं और इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित भी किया जा सकता है।
एचसीजी में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर विशेषज्ञ हैं जिन्हें अनुकूलित और परिणाम-उन्मुख उपचार योजनाओं के साथ प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है जिससे सकारात्मक नैदानिक परिणाम सामने आते हैं।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर है, और शुरुआती चरणों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर से जुडे हुए लक्षण निम्नलिखित है :
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के सटिक कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, कई कारक प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं। प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं :
उम्र के साथ प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर की घटनाएं अधिक होती हैं।
जिन लोगों का प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास होता है उन लोगों में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का जोखिम अधिक होता है। साझा जीन और जीवन शैली कारक के संयोजन के कारण इस प्रकार का कैंसर विकसित होता है
अधिक वसायुक्त आहार का सेवन भी प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले जोखिम कारकों शामिल है। अन्य जोखिम कारकों में मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन और नस्ल शामिल हैं। प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर अन्य नस्लों की तुलना में अफ्रीकी-अमेरिकी और कैरेबियाई पुरुषों में अधिक प्रचलित है।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के लिए स्क्रीनिंग (जांच) करना प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के जोखिम को कम करने या प्रारंभिक अवस्था में इसका पता लगाने में मदद कर सकती है। जिन पुरुषों का प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास होता है और जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है उन पुरूषों को हर साल प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर की स्क्रीनिंग (जांच) का विकल्प चुनने की सिफारिश कि जाती है। स्क्रीनिंग (जांच) में निम्नलिखित में से एक या अधिक परीक्षण शामिल हो सकते हैं :
पीएसए का स्तर जो प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) ग्रंथि द्वारा उत्पादित प्रोटीन होता है, उसकी जांच करने के लिए यह परीक्षण रक्त के नमूने का विश्लेषण करता है। पीएसए का अधिक स्तर कैंसर के विकास का संकेत दे सकता है।
डीआरई के दौरान, डॉक्टर प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) के आकार, आकृती या बनावट के बारें में किसी भी प्रकार की असामान्यताओं की जांच करने के लिए हाथों में दस्ताने पहनकर उंगली को चिकना करके निचले मलाशय और प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) की जांच करते है। यदि कैंसर के विकास का पता चलता है, तो प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) बायोप्सी, एमआरआई स्कैन, सीटी स्कैन और बोन स्कैन जैसे अतिरिक्त परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों के परिणामों के आधार पर उपचार की योजना बनाई जाएगी। एचसीजी में, हमारे प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर विशेषज्ञ बेहतर गुणवत्ता वाली नैदानिक सहायता के साथ और अभिनव उपचार दृष्टिकोण के माध्यम से भारत में सबसे अच्छा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर उपचार प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का उपचार विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे कैंसर के बढ़ने की दर, कैंसर की अवस्था, मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति और मरीज़ की प्राथमिकताएं। यह धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर होने के कारण, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के कुछ मामलों में तत्काल उपचार की आवश्यकता नहीं हो सकती है। इन मामलों में, सक्रिय निगरानी और अवलोकन के माध्यम से प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का प्रबंधन किया जाता है।
सक्रिय निगरानी के माध्यम से, नियमित अंतराल पर पीएसए परीक्षण, रेक्टल परीक्षण और बायोप्सी जैसे परीक्षणों के माध्यम से कैंसर के विकास की बारीकी से निगरानी की जाती है। यदि परीक्षण के परिणाम बदलते हैं, तो डॉक्टर ट्यूमर को निकालने या ट्यूमर के विकास को रोकने के लिए उपचार के विकल्प चुनने का सुझाव दे सकते हैं। जिन पुरुषों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते है और जोखिम भी कम होता है उन पुरुषों के लिए सक्रिय निगरानी उपयुक्त उपचार विकल्प होता है।
जब तक कि कैंसर मेटास्टेसाइज नहीं हो जाता है या लक्षण प्रदर्शित करना शुरू नहीं कर देता है, और फिर इसे एक उपयुक्त उपचार पद्धति के साथ संबोधित नहीं किया जाता है तब तक सतर्कता के साथ प्रतीक्षा कैंसर की निगरानी करने के लक्ष्य के साथ कम गहन फालो – अप (अनुवर्ती) कार्रवाई का एक प्रकार है । वृद्ध पुरुषों और अन्य जानलेवा स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए सतर्कता के साथ प्रतीक्षा उपयुक्त उपचार विकल्प होता है। प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के उपचार की विधियों को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है : लोकलाईज़्ड थेरेपी (स्थानीय चिकित्सा) और सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा)।
लोकलाईज़्ड थेरेपी (स्थानीय चिकित्सा) का मतलब एक विशिष्ट जगह पर ही कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) का इलाज करना है। लोकलाईज़्ड थेरेपी (स्थानीय चिकित्सा) प्रारंभिक चरण का प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर जो केवल प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) ग्रंथि तक ही सीमित है उसके इलाज में उपयोगी होती है ।
सर्जरी में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) को और ग्रंथि के आसपास के कुछ लिम्फ नोड्स को रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी नामक प्रक्रिया के माध्यम से निकालना शामिल होता है। रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी आमतौर पर निम्नलिखित में से किसी एक के माध्यम से की जाती है :
यह एक मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) प्रक्रिया होती है जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) को कैमरे से लैस एक रोबोटिक सिस्टम का उपयोग करके छोटे चीरों के माध्यम से निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया के प्रमुख फायदों में तेजी से रिकवरी और कम रक्तस्त्राव शामिल हैं।
इस प्रक्रिया में, पेल्विस (श्रोणि) क्षेत्र की प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) और लिम्फ नोड्स को निचले पेट में या एनस (गुदा) और (अंडकोश) के बीच में एक चीरा लगाकर निकाल दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में, पेट में छोटा चीरा लगाकर छोटे उपकरण और एक कैमरे का उपयोग करके प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) को निकाल दिया जाता हैं।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) को हाई – एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण किरणें) प्रदान करती है। रेडिएशन (विकिरण) निम्नलिखित माध्यम से वितरित किया जाता है :
ईबीआरटी में शरीर के बाहर से उच्च-ऊर्जा एक्स-रे या प्रोटॉन बीम को ट्यूमर के स्थान तक पहुंचाना शामिल है, जहां यह कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट कर देता है।
इस प्रकार की रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) में, रेडिएशन (विकिरण) के स्रोत, जिसे इम्प्लांट या सीड के रूप में जाना जाता है, उसको प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) के अंदर या उसके बिलकुल करीब रखा जाता है। यह आस पास के स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित किए बिना विशेष रूप से कैंसर के ऊतकों को रेडिएशन (विकिरण) खुराक (उच्च या निम्न) के वितरण की अनुमति देता है।
क्रायोब्लेशन प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) ऊतकों के नियंत्रित फ्रिज़िंग के माध्यम से कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने की एक कम इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) और छवि-निर्देशित प्रक्रिया है। विशेष सुइयाँ, जिन्हें 'क्रायोप्रोब्स' के रूप में जाना जाता है, उनको स्क्रोटम (अंडकोश) और एनस (गुदा) के बीच की त्वचा के माध्यम से प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) में डाला जाता है। फिर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) के ऊतकों को जमाने के लिए इन सुइयों के माध्यम से बहुत कम तापमान वाली गैस पहुंचाई जाती है। बाद में, ऊतक को दोबारा गर्म करने के लिए सुई के माध्यम से दूसरी गैस पहुंचाई जाती है। फ्रिज़िंग और थॉइंग (जमाने और पिघलाने) का चक्र कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारता है।
सिस्टेमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) मेटास्टैटिक प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के प्रबंधन में सहायता करती है, जिसमें कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि (पौरुष ग्रंथि) के बाहर फैल गया है। सिस्टेमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) पूरे शरीर पर कार्य करती हैं और कैंसर के विकास का इलाज करने में मदद करती हैं, कैंसर जहां कहीं भी स्थित हो, पता लगाने के लिए बहुत छोटे कैंसर के इलाज में भी सिस्टेमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) सहायता करती हैं।
हार्मोन थेरेपी पुरुष हार्मोन के स्तर को कम करके काम करती है, जो प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) के विकास के लिए ईंधन के रूप में कार्य करती है। यह प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के विकास को रोकने या देरी करने में मदद करता है। हार्मोन थेरेपी विकल्पों में शामिल हैं :
कीमोथेरेपी में ऐसी दवाएँ शामिल होती हैं जो कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए नसों के माध्यम से या मुँह से दी जाती हैं। इसके कारण उन्नत चरण के प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के पुरुषों में जीवित रहने की दर में वृद्धी होती है और दर्द को कम करने में भी मदद करती है।
इम्यूनोथेरेपी में मरीज़ की अपनी प्रतिरक्षा सेल्स (कोशिकाओं) में से कुछ सेल्स (कोशिकाओं) को निकाला जाता है, उन्हें प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर से लड़ने के लिए आनुवंशिक रूप से तैयार किया जाता है, और फिर इन सेल्स (कोशिकाओं) को नसों के माध्यम से मरीज़ के शरीर में वापस इंजेक्ट किया जाता है। उन्नत चरणों के प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर वाले पुरुषों में अधिक समय तक जीवित रहने के लिए यह उपचार दिया जाता है।
प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर भारतीय पुरुषों में सबसे आम 10 कैंसर में से एक है। पुरुषों में प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर होने का खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है। हालांकि, जागरूकता और नियमित जांच से इसकी घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
व्यापक निदान के माध्यम से आपके प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर की प्रकृति का पता लगाया जा सकता है। यदि आपके डॉक्टर सोचते है कि तत्काल उपचार आवश्यक नहीं है, तो आपको निगरानी या सक्रिय निगरानी में रखा जा सकता है, जिसके दौरान आपको मेटास्टेसिस या किसी अन्य जटिलताओं के लक्षणों के लिए नियमित परीक्षण और लगातार निगरानी करने के लिए कहा जाएगा।यदि परीक्षणों के परिणाम चिंताजनक होते हैं, तो रोग के कुशल प्रबंधन के लिए डॉक्टर तत्काल उपचार योजना का सुझाव दे सकता है।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर का खतरा बढ़ता जाता है। इसलिए, 50 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुषों के लिए हर साल प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर की जांच कराने की सिफारिश की जाती है। आपके पहले स्क्रीनिंग टेस्ट (जांच) के परिणामों के आधार पर, आपके डॉक्टर स्क्रीनिंग टेस्ट (जांच) की आवृत्ति बदल सकते है।
नहीं, उच्च पीएसए स्तर हमेशा प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर की ओर इशारा नहीं करते हैं। सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) जैसी कम गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण भी पीएसए स्तर अधिक हो सकता है। इसलिए, यदि पीएसए स्तर अधिक पाया जाता है, तो प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर के निदान की पुष्टि के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता होती है।
कुछ उपचारों से दर्द हो सकता है, यह दर्द अस्थायी होता है और समय के साथ कम हो जाता है। दर्द की सीमा कैंसर के उस चरण पर भी निर्भर हो सकती है जिसका इलाज किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर जो हड्डियों में फैल गया है उसके लिए दि जाने वाली रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा), दर्द का कारण बन सकती है; हालाँकि, यह सभी मरीज़ों के मामले में नहीं हो सकता है। उपचार से पहले डॉक्टर से बात करना हमेशा बेहतर होता है, जो आपको बताएंगे कि प्रशासित उपचारों से क्या उम्मीद की जाए और उनके लिए कैसे तैयारी की जाए।