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आमतौर पर शरीर के जो हिस्से धूप के संपर्क में आते हैं, उन हिस्सों पर स्किन (त्वचा के) कैंसर बनते है। हालाँकि, शरीर के जो हिस्से धूप के संपर्क में नहीं आते हैं, उन हिस्सों पर भी स्किन (त्वचा के) कैंसर बन सकते है।
जब म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) के कारण त्वचा की सामान्य सेल्स (कोशिकाएं) असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं तब स्किन (त्वचा का) कैंसर होता है । आमतौर पर शरीर के जो हिस्से धूप के संपर्क में आते हैं, उन हिस्सों पर स्किन (त्वचा के) कैंसर बनते है। हालाँकि, शरीर के जो हिस्से धूप के संपर्क में नहीं आते हैं, उन हिस्सों पर भी स्किन (त्वचा के) कैंसर बन सकते है।
यह भारत में कम प्रचलित कैंसर में से एक है। अगर स्किन (त्वचा के) कैंसर का जल्दी पता चल जाए तो उनका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है । त्वचा की किसी भी असामान्य वृद्धि को अनदेखा नहीं करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये स्किन (त्वचा के) कैंसर का संकेत हो सकता है।
जिस सेल (कोशिका) के प्रकार से वे उत्पन्न होते हैं, उसके आधार पर स्किन (त्वचा के) कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
यह स्किन (त्वचा के) कैंसर का सबसे आम प्रकार है, और यह एपिडर्मिस की सबसे निचली परत में बनता है। इस प्रकार का कैंसर धीमी गति से बढ़ता है। ज्यादातर मामलों में, यह कैंसर सिर और गर्दन के क्षेत्रों में विकसित होता है।
यह स्किन (त्वचा के) कैंसर का दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है, और यह कैंसर का प्रकार फ्लैट सेल्स (कोशिकाओं) में शुरू होता है जिसे स्क्वैमस सेल कहा जाता है जो एपिडर्मिस में मौजूद होती है।
मेलानोमा मेलेनिन बनाने वाली सेल्स (कोशिकाएं), जिन्हें मेलानोसाइट्स कहा जाता है उनमें बनता है। यह स्किन (त्वचा के) कैंसर के दुर्लभ और तेजी से फैलने वाले प्रकारों में से एक है।
यह स्किन (त्वचा के) कैंसर का एक और दुर्लभ प्रकार है जो त्वचा के ठीक नीचे मौजूद हार्मोन बनाने वाली सेल्स (कोशिकाओं) में बनता है। यह सिर और गर्दन के क्षेत्रों में अधिक आम है।
अन्य दुर्लभ प्रकार के स्किन (त्वचा के) कैंसर में क्यूटेनीअस टी-सेल लिंफोमा, डर्माटोफिब्रोसारकोमाप्रोट्यूबेरन्स (डीएफएसपी) और सिबेशस कार्सिनोमा शामिल हैं।
स्किन (त्वचा के) कैंसर के प्रकार के आधार पर हर एक मरीज़ में लक्षण अलग अलग हो सकते हैं। स्किन (त्वचा के) कैंसर के कुछ मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं :
स्किन (त्वचा के) कैंसर का सटिक कारण ज्ञात नहीं है। हालाँकि, स्किन (त्वचा के) कैंसर होने की संभावना को बढ़ाने वाले कुछ जोखिम कारकों की पहचान की गई हैं :
जिन लोगों की त्वचा का रंग गोरा होता है, उनकी त्वचा में मेलेनिन वर्णक कम होते हैं, उन लोगों को स्किन (त्वचा का) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
जो लोग लंबे समय तक धूप में रहते हैं, खासकर त्वचा की कोई भी सुरक्षा किए बिना, उन लोगों में स्किन (त्वचा के) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिन लोगों को कई तिल होते है या असामान्य तिल होते है, जो तिल सामान्य तिल से आकार में बड़े दिखाई देते हैं, उन लोगों को स्किन (त्वचा का) कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है।
जो लोग धूप वाले (गर्म) मौसम या अधिक ऊंचाई वाली जगहों पर रहते हैं, धूप के संपर्क में न आने वाले लोगों की तुलना में अधिक धूप के संपर्क में आने वाले लोगों के लिए स्किन (त्वचा के) कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
बार-बार सनबर्न होना स्किन (त्वचा के) कैंसर के गठन के बढ़ते जोखिम से जुड़ा होता है।
जो लोग सन लैम्प के माध्यम से कृत्रिम टैनिंग करते हैं, उनमें मेलेनोमा होने का जोखिम अधिक होता है।
जिन लोगों के किसी करीबी रिश्तेदार को स्किन (त्वचा के) कैंसर का निदान हुआ है, उन्हें भी स्किन (त्वचा के) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
जिन लोगों को पहले स्किन (त्वचा के) कैंसर का निदान हुआ था, उन्हें फिर से स्किन (त्वचा का) कैंसर हो सकता है।
जो लोग रेडिएशन (विकिरण) (अपने पिछले उपचारों से) और खतरनाक रसायनों, जैसे कि आर्सेनिक, औद्योगिक सॉल्वैंट्स और अन्य रसायनों के संपर्क में आते हैं, उनमें स्किन (त्वचा का) कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है।
दीर्घकालिक एचपीवी संक्रमण से स्किन (त्वचा के) कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है उन लोगों को स्किन (त्वचा का) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
स्किन (त्वचा का) कैंसर उन कुछ कैंसरों में से एक है जिन्हें देखा जा सकता है। और, बहुत कम परीक्षणों से इसका पता लगाया जा सकता है :
जब कोई मरीज़ स्किन (त्वचा के) कैंसर के लक्षणों के साथ आता है, तो डॉक्टर सबसे पहले किसी असामान्य तिल, त्वचा का बाहर निकलना, घावों आदि के लिए मरीज़ की शारीरिक जाँच करता है। यदि उसे स्किन (त्वचा के) कैंसर का संदेह होता है, तो अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
बायोप्सी के दौरान, असामान्य ऊतक का एक छोटा सा नमूना इकठ्ठा किया जाता है और सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के बारें में पता लगाने के लिए माइक्रोस्कोप के तहत उसकी जाँच की जाती है। यह परीक्षण रोग का एक निश्चित निदान प्राप्त करने में मदद करता है। स्टेजिंग के लिए, पेट सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन आदि विभिन्न इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है। लिम्फ नोड्स जो ट्यूमर के करीब होते हैं, उन्हें भी इकठ्ठा किया जा सकता है और मेटास्टेसिस के संकेतों की जांच की जा सकती है।
उपचार की योजना बनाने से पहले, कैंसर का प्रकार, इसका चरण, इसका स्थान, मरीज़ की उम्र और रोग प्राथमिक है या रोग का पुनरावर्तन है, आदि जैसे विभिन्न कारकों पर विचार किया जाता है ।
स्किन (त्वचा के) कैंसर के प्रबंधन के लिए कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
स्किन (त्वचा के) कैंसर के लिए सर्जरी प्राथमिक उपचार है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन द्वारा कैंसर के ऊतक को सर्जरी के माध्यम से हटा दिया जाता है। उपचार की समग्र प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए सर्जरी को अन्य उपचारों के साथ संयोजित किया जा सकता है। स्किन (त्वचा के) कैंसर के प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रकार की सर्जरी उपलब्ध हैं :
क्रायोसर्जरी मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) प्रक्रियाओं में से एक है जिसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए त्वचा पर लिक्विड नाइट्रोजन का छिड़काव किया जाता है। समय के साथ, मृत ऊतक एक पपड़ी बनाते है और गिर जाते है। इस उपचार से त्वचा की सतह पर मौजूद कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट किया जाता है। बहुत छोटे कैंसर के प्रबंधन के लिए, इस उपचार को अन्य उपचार विकल्पों के साथ संयोजित किया जाना चाहिए।
क्युरेटेज एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को खुरच कर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद कॉटरी या इलेक्ट्रोसर्जरी की जाती है, जिसमें उपचार की गई जगह के किनारों में मौजूद अवशिष्ट कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए विद्युत प्रवाह का उपयोग किया जाता है। इलेक्ट्रोसर्जरी रक्तस्राव को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। विशेष रूप से शुरुआती चरण के स्किन (त्वचा के) कैंसर के लिए, इस उपचार के उत्कृष्ट नैदानिक परिणाम पाए गए हैं।
आमतौर पर, पहले कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की जांच की जाती है और बाद में सर्जरी की जाती है। हालांकि, मोहस सर्जरी के दौरान, इसके विपरित तरीका होता है। इस प्रक्रिया के दौरान, कैंसर युक्त त्वचा की पतली परतों को धीरे-धीरे हटा दिया जाता है और जब तक विश्लेषण के दौरान त्वाचा की परतें कैंसर-मुक्त दिखाई न दें तब तक निरीक्षण किया जाता है । मोहस सर्जरी का लक्ष्य आसपास के स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करते हुए जितना संभव हो उतना स्किन (त्वचा के) कैंसर को दूर करना है।
इस सर्जिकल प्रक्रिया का उपयोग सभी प्रकार के स्किन (त्वचा के) कैंसर के प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। वाईड एक्सिश़न (व्यापक छांटना) सर्जरी के दौरान, सर्जन कैंसर के ऊतक को आसपास के स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे से हिस्से जिसे मार्जिन कहा जाता है, उसके साथ निकाल देते है।
यदि सर्जरी के दौरान मरीज़ की त्वचा के एक बडे हिस्से को निकालना पडता है, तो डॉक्टर रीकन्स्ट्रक्टिव (पुनर्निर्माण) सर्जरी की सिफारिश कर सकते हैं, जिसमें त्वचा का फ्लैफ या त्वचा का प्रत्यारोपण शामिल हो सकता है। ज्यादातर मामलों में, ट्यूमर वाली जगह के करीब स्वस्थ ऊतक के साथ रीकन्स्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) किया जाता है।
यदि आस-पास के अंगों में कैंसर के फैलने का संदेह होता है, तो डॉक्टर पास के लिम्फ नोड्स की जांच की सिफारिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के लिए, लिम्फ नोड्स को सर्जरी के माध्यम से निकाल दिया जाता है, और उनकी सेल्स (कोशिकाओं) की कैंसर के संकेतों के लिए जांच की जाती है।
यह उपचार कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) का उपयोग करता है, जो एक्स-रे या प्रोटॉन बीम हो सकते है। स्किन (त्वचा के) कैंसर के मामलों के लिए, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) के उपचार विकल्पों के साथ पूरी तरह से संयोजित किया जा सकता है, या उन्नत चरण के स्किन (त्वचा के) कैंसर के मामले में बीमारी के कारण होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए भी रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का उपयोग किया जा सकता है।
स्किन (त्वचा के) कैंसर जो त्वचा की गहरी परतों में नहीं घुसे हैं, उनके उपचार के लिए डॉक्टर टोपिकल (स्थानिक) कीमोथेरेपी की सिफारिश कर सकते हैं, जिसमें असामान्य सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए घावों पर एंटीकैंसर दवाओं वाली क्रीम लगाई जाती हैं। स्थानिय उपचार के रूप में, टोपिकल (स्थानिक) कीमोथेरेपी स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती है। दूसरी ओर, जहां कैंसर अन्य अंगों में फैल गया है, उन मामलों में सिस्टमिक (प्रणालीगत) कीमोथेरेपी की सिफारिश की जा सकती है । यह दृष्टिकोण पूरे शरीर में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने में मदद करता है।
यह स्किन (त्वचा के) कैंसर के लिए सिफारीश कि जाने वाली चिकित्सा का एक अनोखा रूप है जिसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए हाई – एनर्जी लेज़र बीम (उच्च-ऊर्जा लेजर किरणों) और दवाओं के संयोजन का उपयोग किया जाता है।
हां, स्किन (त्वचा के) कैंसर का इलाज संभव है। हालांकि, हर किसी को लक्षणों से सावधान रहने और उन्हें डॉक्टर को रिपोर्ट करने की आवश्यकता है। यह शुरुआती पहचान और उचित उपचार में मदद कर सकता है।
हां, शुरुआती चरणों में स्किन (त्वचा के) कैंसर का पता लगाया जा सकता है, बशर्ते आपको उन लक्षणों के बारे में पता हो, जिन पर आपको ध्यान देने की आवश्यकता होती है।आप स्किन (त्वचा के) कैंसर के संकेतों के लिए अपनी त्वचा की जांच कैसे कर सकते हैं इसके बारें में नीचे बताया गया है :
हां, स्किन (त्वचा के) कैंसर वापस आ सकते हैं - वे एक ही स्थान पर या अलग अलग जगहों पर दोबारा हो सकते हैं।
हालांकि, बार-बार होने वाले स्किन (त्वचा के) कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।
स्किन (त्वचा के) कैंसर के मरीज़ों को सख्ती से अपनी फालो – अप अपॉइंटमेंट (अनुवर्ती नियुक्तियों) को जारी रखना चाहिए, क्योंकि ये स्किन (त्वचा के) कैंसर के पुनरावर्तन के बारें में उसके प्रारंभिक चरण में पता लगाने में मदद कर सकते हैं जब डॉक्टर उनका सर्वोत्तम तरीके से इलाज कर सकते हैं।
स्किन (त्वचा का) कैंसर होने के अपने जोखिम को कम करने के लिए आप कुछ उपायों का पालन कर सकते हैं :