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पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉयड कैंसर अधिक आम है। हालांकि हाल के कुछ वर्षों में थायरॉयड कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इस प्रकार के कैंसर के मरीज़ों में जीवित रहने की दर उत्कृष्ट होती है।
जब थायरॉयड ग्रंथि की सेल्स (कोशिकाएं) असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं तब थायरॉयड कैंसर होता है । पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉयड कैंसर अधिक आम है। हालांकि हाल के कुछ वर्षों में थायरॉयड कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इस प्रकार के कैंसर के मरीज़ों में जीवित रहने की दर उत्कृष्ट होती है। हालाँकि, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि गर्दन के क्षेत्र में दर्द और सूजन। रिपोर्ट्स से पता चलता है की लगभग 90% थायरॉयड ट्यूमर सौम्य होते है।
हालांकि हाल के कुछ वर्षों में थायरॉयड कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इस प्रकार के कैंसर के मरीज़ों में जीवित रहने की दर उत्कृष्ट होती है।
थायरॉयड कैंसर कई प्रकार के होते हैं; कुछ तेज गती से फैलने वाले कैंसर होते हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे बढ़ने वाले कैंसर होते हैं।
पैपिलरी थायरॉइड कैंसर फॉलिक्युलर सेल्स (कूपिक कोशिकाओं) में शुरू होता है, जो थायरॉइड हार्मोन का संश्लेषण और भंडारण करती हैं। यह थायरॉयड कैंसर का सबसे प्रचलित प्रकार है। पैपिलरी थायरॉयड कार्सिनोमा किसी भी उम्र में हो सकता है, हालांकि यह 30 से 50 साल की उम्र के वयस्कों में सबसे आम है। ये कैंसर गर्दन में मौजूद लिम्फ नोड्स में फैलते हैं।
फॉलिक्युलर थायरॉइड कैंसर फॉलिक्युलर सेल्स (कूपिक कोशिकाओं) से भी विकसित होता है। यह 50 साल से अधिक उम्र के वयस्कों में सबसे आम है। हर्थल सेल कार्सिनोमा फॉलिक्युलर (कूपिक) थायरॉयड कैंसर का एक उपप्रकार है, और यह थायरॉयड कैंसर का बहुत अधिक आक्रामक रूप है। इस प्रकार का थायरॉयड कैंसर पास के लिम्फ नोड्स और रक्त वाहिकाओं में फैल सकता है।
इसे अन्डिफरेन्शीऐटिड कार्सिनोमा भी कहा जाता है, इस प्रकार का थायरॉयड कैंसर तेजी से फैलता है और इसका इलाज करना भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। 60 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में एनाप्लास्टिक थायरॉइड कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
यह कैंसर का प्रकार सी सेल्स (कोशिकाएं) जिनका काम कैल्सीटोनिन हार्मोन का उत्पादन करना होता है उनमें शुरू होता है। रक्त में कैल्सीटोनिन हार्मोन का अधिक स्तर प्रारंभिक चरण के मेडुलरी थायरॉइड कैंसर का संकेत हो सकता है।अन्य दुर्लभ प्रकार के थायरॉयड कैंसर में थायरॉयड लिंफोमा और थायरॉयड सार्कोमा शामिल हैं।
प्रारंभ में, थायरॉयड कैंसर कोई लक्षण नहीं दिखा सकता है। हालाँकि, जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, यह निम्नलिखित लक्षणों को जन्म दे सकता है :
हाल के वर्षों में, शोधकर्ताओं ने कुछ प्रमुख जोखिम कारकों की पहचान की है जो थायरॉयड कैंसर से दृढ़ता से जुड़े हुए हैं, और वे हैं :
विशेष रूप से बचपन के दौरान रेडिएशन (विकिरण) के संपर्क में आने से थायरॉयड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉयड कैंसर अधिक आम है।
जिन लोगों के परिवार में गोइटर (थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना) और अन्य थायरॉयड विकार का इतिहास रहा हो उन लोगों में थायरॉयड कैंसर होने की संभावना अधिक होती है ।
आहार में आयोडीन की कमी होने पर कुछ प्रकार के थायरॉयड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हर दस में से लगभग 2 मेडुलरी थायरॉइड कार्सिनोमा (एमटीसी) का कारण आनुवंशिक रुप से मिले दोषपूर्ण जीन का होना है।
थायरॉयड की अधिकांश गांठे नॉन - कैंसरस होती हैं। हालाँकि, उन्हें अनदेखा करना सही नहीं है। यदि गर्दन के क्षेत्र में कोई गांठ या सूजन या दर्द है जो दो सप्ताह से अधिक समय तक रहा है, तो विशेषज्ञ से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। थायरॉयड कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्य परीक्षण विधियाँ निम्नलिखित हैं :
डॉक्टर गांठ (नोड्यूल्स) के लिए थायरॉयड ग्रंथि की जांच करते हैं। वह गर्दन और आस पास के लिम्फ नोड्स में असामान्य वृद्धि या सूजन की भी जांच कर सकते है।
थायरॉयड की समस्या होने पर रक्त में थायरॉयड - स्टिम्युलैटिंग हार्मोन (टीएसएच) के स्तर की जाँच की जा सकती है। अगर टीएसएच हार्मोन का स्तर बहुत अधिक या बहुत कम है, तो यह दर्शाता है कि थायरॉयड ठीक से काम नहीं कर रहा है।
थायरॉयड ग्रंथि और आसपास के ऊतकों की स्पष्ट छवियां प्राप्त करने के लिए, एक अल्ट्रासाउंड स्कैन करने की सिफारीश की जा सकती है। थायरॉइड गांठ (नोड्यूल्स) जो महसूस करने के लिए बहुत छोटे होते हैं, उन्हें इस छवि में देखा जा सकता है। द्रव से भरे हुए अधिकांश गांठ (नोड्यूल) कैंसर नहीं होते हैं। ठोस गांठ (नोड्यूल) कैंसर हो सकता है।
थायरॉयड स्कैन के दौरान, मरीज़ को थोड़ी मात्रा में रेडीओऐक्टिव पदार्थ निगलने के लिए कहा जाता है, जो आमतौर पर रेडीओऐक्टिव आयोडीन होता है; यह निगला जाता है और रक्तप्रवाह के माध्यम से ले जाया जाता है। रेडीओऐक्टिव पदार्थ को अवशोषित करने वाली थायरॉयड सेल्स (कोशिकाओं) को, एक स्कैन पर आसानी से देखा जा सकता है। वे ऊतक जो अधिक मात्रा में रेडीओऐक्टिव पदार्थ को अवशोषित करते हैं, चमकीले धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं और उन्हें हॉट नोड्यूल कहा जाता हैं। इन हॉट नोड्यूल में से अधिकांश कैंसरस नहीं होते हैं; हालाँकि, कुछ मामलों में वे थायरॉयड कैंसर का संकेत भी दे सकते हैं। निश्चित निदान प्राप्त करने के लिए आगे के परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
थायरॉयड कैंसर का निश्चित निदान प्राप्त करने का एक तरीका बायोप्सी के माध्यम से होता है। पैथोलोजिस्ट कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए थायरॉयड ऊतक के नमूने की माइक्रोस्कोप के तहत जांच करता है।
आमतौर पर थायरॉइड कैंसर का बहु आयामी दृष्टिकोण के माध्यम से इलाज किया जाता है। एचसीजी में, हमारे पास एक बहु-विध टीम है जो मरीज़ की स्वास्थ्य स्थिति का ध्यानपूर्वक अध्ययन करती है और उसके अनुसार सर्वोत्तम उपयुक्त उपचार योजना तैयार करती है, जिसमें एक या अधिक उपचार के तरीके शामिल हो सकते हैं।
सर्जरी में ट्यूमर को हटाने के साथ-साथ उसके आसपास के स्वस्थ ऊतक (मार्जिन) का एक छोटा सा हिस्सा निकालना शामिल होता है। थायरॉयड कैंसर के लिए उपलब्ध विभिन्न सर्जिकल विकल्प हैं :
यह सर्जरी थायरॉयड ग्रंथि के कैंसर से प्रभावित लोब को निकाल देती है।
यह सर्जरी थायरॉयड के ऊतकों के एक छोटे से हिस्से को छोड़कर दोनों थायरॉयड लोब को निकाल देती है।
यह सर्जरी थायरॉयड ग्रंथि को पूरी तरह से निकाल देती है। यदि थायरॉयड कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है, तो उन्हें भी निकाला जा सकता है।
थायरॉयड हार्मोन थेरेपी एक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (प्रतिस्थापन उपचार) है जिसमें प्राकृतिक थायरॉयड हार्मोन के असामान्य रूप से कम स्तर में सुधार करने के लिए सिंथेटिक थायरॉयड हार्मोन को प्रशासित किया जाता है। आमतौर पर थायरॉयड हार्मोन थेरेपी, गोली के रूप में दी जाती है, यह थेरेपी थायरॉयड हार्मोन द्वारा नियंत्रित शारीरिक कार्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। सर्जरी के बाद इस उपचार की सिफारिश की जाती है।
रेडीओऐक्टिव आयोडीन चिकित्सा रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का एक रूप है जिसमें ट्यूमर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए आयोडीन का एक रेडीओऐक्टिव आइसोटोप दिया जाता है। आमतौर पर सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए रेडीओऐक्टिव आयोडीन उपचार दिया जाता है। रेडियोआयोडीन या तो तरल के रुप में या गोली के रूप में दिया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) के दौरान, ट्यूमर को ठीक से लक्षित करने और कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए हाई – एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण किरणों) का उपयोग किया जाता है। यहां, रेडीओऐक्टिव आयोडीन चिकित्सा के विपरीत, रेडिएशन (विकिरण) एक बाहरी स्रोत (लिनीअर ऐक्सेलरेटर) के माध्यम से दिया जाता है। आमतौर पर, उपचार की कुल प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) दी जाती है।
कीमोथेरेपी कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली दवाओं का उपयोग करती है। ये दवाएं पूरे शरीर में संचारण करती हैं और जहां भी कैंसर सेल्स (कोशिकाएं) मौजूद होती हैं उन्हें मार देती हैं। थायरॉयड कैंसर के मामले में, कीमोथेरेपी की सिफारिश तब की जाती है जब कैंसर मेटास्टेसाइज हो जाता है। कीमोथेरेपी को मौखिक और नसों के माध्यम से (इन्ट्रवीनस्ली) दोनों तरह से प्रशासित किया जा सकता है। मरणासन्न रूप से बीमार मरीज़ों में दर्द और बीमारी के कारण होने वाले अन्य लक्षणों को कम करने के लिए भी इसकी सिफारिश की जा सकती है।
थायरॉयड कैंसर जीवित रहने की उत्कृष्ट दर के साथ अत्यधिक उपचार योग्य कैंसर में से एक है। हालांकि, रोग का प्रोग्नोसिस (पुर्वानुमान) उस चरण पर निर्भर करता है जिस पर रोग का निदान किया जाता है। उन्नत चरण के थायरॉइड कैंसर की तुलना में प्रारंभिक चरण के थायरॉइड कैंसर में जीवन की उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ साथ जीवित रहने की दर भी बेहतर होती है।
इसलिए, गर्दन के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गांठ, सूजन या दर्द जो दो सप्ताह से अधिक समय तक रहता है उसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ।
हालांकि थायरॉयड कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है, लेकीन सख्त फालो – अप (अनुवर्ती) देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि अधिकांश थायरॉयड ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और 10 से 20 साल के बाद भी इसका रिलैप्स (पुनरावर्तन) हो सकता हैं। फालो – अप (अनुवर्ती) विज़िट के दौरान गर्दन क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ विशिष्ट रक्त परीक्षण और अन्य परीक्षण विधियों के साथ चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण की सिफारिश की जाती है। ये फालो – अप (अनुवर्ती) विज़िट रोकथाम और रिलैप्स (पुनरावर्तन) की शीघ्र पहचान में सहायता करते हैं।
यदि प्रारंभिक अवस्था में निदान नहीं किया जाता है, तो थायरॉयड कैंसर थायरॉयड ग्रंथि से पास के लिम्फ नोड्स और आसपास के अंगों, जैसे कि अन्नप्रणाली और श्वास नलिका में फैल सकता है। उन्नत चरणों में, ये कैंसर संभावित रूप से लंग्ज (फेफड़ों) या हड्डियों में भी फैल सकता हैं।
नहीं, हाइपरथायरायडिज्म या एक अतिसक्रिय थायरॉयड ग्रंथि हमेशा थायरॉयड कैंसर का संकेत नहीं देती है। हालांकि, कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि थायरॉयड कैंसर के मरीज़ों के एक छोटे प्रतिशत में सौम्य थायरॉयड की स्थिति का इतिहास होता है।